ये तरक्की नहीं






ये तरक्की नहीं,जाने किस जहाँ को जा रहे हैं हम,
फुटपाथ पर विद्या,एसी में जो जूते सजा रहे हैं हम।
पहले जिसे वासी कह कर,फेंक दिया करते थे,
बंद पैकेटों में बर्षों का जो खा रहे हैं हम।

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