संदेश

सितंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

समसामयिकी

आज देश बचाने की जो बातें कर रहे हैं,  हमारी कमाई अपनी तिजोरी में भर रहे हैं। खटमल की तरह खुद ही चूस रहे है देश को,  फिर भी हमसे देशप्रेम की बातें कर रहे हैं।