समसामयिकी

आज देश बचाने की जो बातें कर रहे हैं, 
हमारी कमाई अपनी तिजोरी में भर रहे हैं।
खटमल की तरह खुद ही चूस रहे है देश को, 
फिर भी हमसे देशप्रेम की बातें कर रहे हैं।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ये तरक्की नहीं

ज़रा सी बात पे

मुक्तक