ज़रा सी बात पे

ज़रा सी बात को हंगामा बना देते हैं,
बनाने वाले ही रचना को मिटा देते हैं।

बडे़ शातिर हैं हमारे ही आज के नेता,
मजहबी आग में हमको ही जला देते हैं।

तुम्हें जो है तो कर लो भरोसा इन पर,
जो अपने हित में अपनों को मिटा देते है।

इनकी हर चाल से वतन को हताशा ही हुआ,
सजा गुलदस्ते को डाली को कटा देते हैं।

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