देशहित में कोई मतभेद नहीं होना चाहिए, मामला व्यक्तिगत हो राजनैतिक हो या आपसी रंजिश का आज हर बात पर हर मुद्दे पर भिन्न-भिन्न प्रतिक्रियाएं एक दूसरे को नीचा दिखाने और राजनीतिक लाभ के होड़ ने, देश की अस्मिता पर काला दाग लगा दिया है। एक ही विषय पर पार्टी, संगठन और समूहों का बँट जाना और लड़ना कहां तक जायज और देशहित में है, बिखराव और पतन की ओर अग्रसर होना है।
ज़रा सी बात को हंगामा बना देते हैं, बनाने वाले ही रचना को मिटा देते हैं। बडे़ शातिर हैं हमारे ही आज के नेता, मजहबी आग में हमको ही जला देते हैं। तुम्हें जो है तो कर लो भरोसा इन पर, जो अपने हित में अपनों को मिटा देते है। इनकी हर चाल से वतन को हताशा ही हुआ, सजा गुलदस्ते को डाली को कटा देते हैं।
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