समसामयिकी

उसे लगा की,काम खजाने आएँगे, 
उसे भी कुछ लोग,बचाने आएँगे।
प्यार और मार दोनों जानते हैं हम, 
अब न तेरे गुजरे,जमाने आएँगे।

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