मुक्तक
मुद्दतों बाद मिली तो रुलाई बहुत,
अपनी गुस्ताखी की दी सफाई बहुत।
मेरी हर इल्तिजा को ठुकराने वाली,
वक्त के तमाचे पर पछताई बहुत।
अपनी गुस्ताखी की दी सफाई बहुत।
मेरी हर इल्तिजा को ठुकराने वाली,
वक्त के तमाचे पर पछताई बहुत।
प्ले बटन दबायें
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें